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चीन इतना आमीर किसे बना?

 




परिचय

1946 से 1949 में चीन की क्रांति हुई जिस के बाद 1 अक्टूबर 1949 में चीनी लोक गणराज्य (पिपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना)  जो की एक साम्यवादी सरकार थी उसकी स्थापना की जिसके प्रथम राष्ट्रपति माओ ज़ेडोंग बने |

आर्थिक नीतिया

1958 तक माओ ज़ेडोंग चीन के राष्ट्रपति रहे उनके समय चीन की आर्थिक निति पूरी तरह से असफल रही | उन्होंने ग्रेट लीप फॉरवर्ड निति 1958 में लागु की जिसमें चीन की सरकार ने सारे जमीन को अपने कब्जे में ले लिया | जिसके तहत किसानो और मजदूरों से बलपूर्वक काम कराया गया | लेकिन खेती के लिए सिचाई की ख़राब वेवस्थ और तकनीक के आभाव के कारण खेती को बर्बाद कर दिया | जिसके कारण भूखमरी के कारण हजारो लोग मरे गए | ग्रेट लीप फॉरवर्ड निति के तहत बैकयार्ड फुर्नासस भी बनाये गए जिससे इस्पात के उत्पाद के लिए छोटे कारखाने भी बनाये गए जिससे इस्पात का उत्पाद बढे और वो बड़े कारखानों में तब्दील हो | लेकिन ख़राब तकनीक और जानकारी की कमी के कारण ये भी बर्बाद हो गए | चीन में बड़े इस्पात कारखाने ही अच्छे इस्पात का उत्पादन कर पा रहे थे | चीन की अर्थव्यवस्था के गिरने, भूखमरी और गरीबी के चलते कोमुनिस्ट पार्टी के खिलाफ विद्रोह होने लगे | जिसे दबाने के लिए माओ ज़ेडोंग ने 1966 में सांस्कृतिक क्रांति चालू जिसमें कई नेताओ को मर दिया गया | माओ ज़ेडोंग की 1976 में मृत्यु के बाद देंग शियाओपिंग चीन के नये राष्ट्रपति बने जो की खुद सांस्कृतिक क्रांति के शिकार थे | राष्ट्रपति बनने के बाद देंग शियाओपिंग ने माओ ज़ेडोंग के नीतियों को हटा दिया या बदल दिया | देंग शियाओपिंग ने चीन में आर्थिक सुधार किये जो 1990 आते-आते चीन की अर्थव्यवस्था का इतने तेजी से बढने का कारण बना |

मानव संसाधन

1978 में 95 करोड़ चीन की आबादी ही चीन को आगे लेजाने में सहायक बनी | चीन में बहुत बड़ी आबादी तो थी पर वो योग्य नहीं थी | जिसका प्रमुख कारण माओ ज़ेडोंग की सांस्कृतिक क्रांति थी जिसके तहत बगावत को रोकने के लिए माओ ज़ेडोंग ने स्कूल और कॉलेज को बंद कर दिया | और खेतो में इन मजदूरों को शिक्षित होने से रोका ज्यादातर गावों में | शियाओपिंग ने माओ ज़ेडोंग के नीतियों को हटाना या बदलना चालू किया | इतनी बड़ी श्रमबल को सही तरीके से उपयोग में लाना और बिना किसी प्रलोभन और प्रोत्साहन के जबरन काम करवाना बहुत ही मुश्किल काम था | और विद्रोहियों का डर भी था | साथ ही अकुशल मजदूरों कारखानों जैसे की इस्पात के कारखानों या भरी उद्योग में काम नहीं कर सकते थे | इसलिए देंग शियाओपिंग ने इन्हें खेती और छोटे उद्योगों में सिमित रखा | देंग शियाओपिंग ने खेती की जमीन पे से सरकार का नियंत्रण ख़तम किया और निजी खेती को बढ़ावा दिया | पहले खेती की सारी कमाई सरकार के पास जाती थी और सरकार के द्वारा किसानो को कुछ तनख्वाह दी जाती थी | लेकी अब किसान सरकार को कर दे कर बाकि अनाज बाज़ार में बेच सकता था | ये निति सफल रही और इसके कारण चीन जो भूखमरी से गुजर रहा था वो आव्यसकता से ज्यादा आनाज उत्पन्न करने लगा | खेती के उछाल के कारण किसानो की आय बढ़ी और उन्हें गरीबी रेखा से ऊपर उठाया | और जिसके कारण अब किसान नकदी फसल (व्यावसायिक फसल) जैसे की गन्ना, कपास इत्यादि में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया | इसमें कपास सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली नकदी फसल थी |

टाउनशिप और विलेज इंटरप्राइजेज

 खेती में काम कर रहे अतिरिक्त मजदूरों को पहले छोटे कारखानों में भेजा गया |  देंग शियाओपिंग टाउनशिप और विलेज इंटरप्राइजेज को बढावा दिया जो खिलौने, लकड़ी का सामान और उर्वरक या खाद इत्यादि का उत्पादन करते थे | ये टाउनशिप और विलेज इंटरप्राइजेज 1990 में चीन की अर्थवयवस्थ के आधार बने कपडा उद्योग के साथ – साथ | ये टाउनशिप और विलेज इंटरप्राइजेज भी सुधर का हिस्सा थे जो की माओ ज़ेडोंग की ख़राब निति के तहत कम्यून और ब्रिगेड इंटरप्राइजेज कहलाते थे | जो की राज्य के आधीन थी | ये ऊपर से नियंत्रित की जाती थी जो की नहीं चल पाई | सरकार के अधीन होने के कारण यहाँ बहुत ही ज्यादा भ्रष्टाचार था | और इसमें ऊपर से नियंत्रण के कारण स्थानीय समस्याओ का समाधान नहीं कर पाई | इसलिए देंग शियाओपिंग ने इसमें निजी और पब्लिक प्राइवेट जॉइंट व्यापार और स्थानीय सरकार को नियंत्रण दिया गया जिससे स्थनीय समस्याओ का समाधान किया जा सके |  वोल्लोंगोंग विश्वविद्यालय के शोध में ये पता चला की ये छोटे उद्योग 1985 में चीन की अर्थ्वेवास्थ में 13 प्रतिशत का सहयोग करते थे वे 1990 में बढ़ कर 30 प्रतिशत का सहयोग करने लगे साथ ही इन्होने 10 करोड़ से ज्यादा गावों रोजगार के अवसर भी पैदा किये |

कपड़ा उद्योग

 खेती में व्यवसायीकरण ने नकदी फसल को बढ़ावा दिया | और चीन 1990 में कपास का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया | इससे कपडा उद्योग तेजी से बढने लगी यहाँ भी निजी व्यापार को बढ़ावा दिया गया | और साथ ही खेती के ज्यादा मजदूरों को कपडा उद्योग में भेजा गया | स्थनीय कपास के उत्पादन और कम आय वाले मजदूरो के कारण कपडा उद्योग को बढ़ावा मिला | इसके कारण 1993 में कपडा उद्योग का विकास दर 95% था | इससे सस्ते कपड़ो का निर्यात भी चलू हुआ | और ओपन डोर पालिसी के कारण चीन दुनिया की अर्थवयवस्था के साथ जुड़ गया था | बाद में चीन ने अपने कपडा उद्योग को पास के देशो में भेज दिया |

मजदूरों का कौशल विकाश

इसके लिए चीन ने 9 साल स्कूल में पढ़ना जरुरी किया जिसमें औद्योगिक पढाई भी सामिल थी  | तकनिकी शिक्षा के लिए तकनिकी और औद्योगिक पढाई और प्रशिक्षण बने गयी | अभी ये तकनिकी और औद्योगिक पढाई और प्रशिक्षण और स्कूल पुरे चीन में फैले हुए है | उद्योग और संगठन भी महाविद्यालयों में इंटर्नशिप देती है | इन सब के प्रयास के चलते 1990 में प्राथमिक शिक्षा सभी के लिए हो गयी | और सन्नातक (ग्रेजुएट) की संख्या 1978 में 1.65 लाख से बढ़ कर 9.5 लाख हो गयी |

 इलेक्ट्रिनिक्स सामानों का उत्पादन

1990 के सुरवात में जापान की कंपनी सोनी और पैनासोनिक, दक्षिण कोरिया की कंपनी LG और सैमसंग पूरबी एशिया की कंपनी के टीवी, फ्रिज और रेडिओ की दुनिया भर में मांग बढ़ने लगी | लेकिन और कारखाने लगाने के लिए उनके पास न ही मजदूर थे न ही जमीन यहाँ चीन ने बड़ा फौड़ा उठाया और इन कंपनीज को अपने देश में कारखाने लगाने को कहा क्युकी सस्ता कौशल प्राप्त मजदूर और जमीन तो थी ही चीन के पास | और यहाँ से सुरु हुई चीन के आर्थिक महाशक्ति बनने का सफ़र | कपड़ो के निर्यात में महारत प्राप्त करने के बाद चीन को पता चल चूका था की सस्ता कौशल प्राप्त मजदूर से ही वो दुनिया का औद्योगिक क्षेत्र बन सकता है | और स्थानीय मजदूर और कारोबारियों ने इन कंपनी की तकनीक को इस्तेमेल कर खुदके कारखाने बनाए और सस्ते टेलीफोन, वीसीआर, टेलेविज़न और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाना शुरू किया | इसी रणनीति के तहत चीन ने कई सारी विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाए और अनुपालन, कर और शुल्क कम किये | विशेष आर्थिक क्षेत्र के लिए बहुत ज्यादा आधारभूत संरचनाओ पे खर्च किये गए ताकि आपूर्ति श्रंखला मजबूत  हो और बाहरी निवेशको को आकर्षित किया जा सके इन आधारभूत संरचनाओ में तेजी से चलने वाली ट्रेन, एक्सप्रेसवे और विद्युत् ग्रिड आदि शामिल थे |

शेन्ज़ेन : चीन का कारखाना

1980 में चीन का पहला विशेष आर्थिक क्षेत्र शेन्ज़ेन बना जो की गुआंग्दोंग प्रान्त में है यहाँ आज 60 हजार से ज्यादा कारखाने है | ये प्रान्त आज चीन के 30% निर्यात में शामिल है और इस लिए ये चीन का कारखाना बना | गुआंग्दोंग प्रान्त में शेन्ज़ेन ज्यादातर तकनिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स केंद्र बना इसी लिए इसे आज चीन की सिल्लिकोन वैल्ली भी कहा जाता है | शेन्ज़ेन 1980 और 1990 में ज्यादा तरक्की करने वाला शहर बना और ताइवान की कंपनी फोक्सकोन्न ने 1988 में अपनी पहला कारखाना खोला जिसके आज चीन में 12 से ज्यादा कारखाने हैं | और यहाँ दक्षिण कोरिया की बड़ी कंपनी Samsung ने 1992 में औद्योगिक कारखाना लगाया | और बाद में Panasonic, LG और अन्य भी यहाँ आये | इतने ज्यादा आर्थिक तेजी के बाद चीन को दो बाते समझ आ गयी थी पहली की इलेक्ट्रॉनिक्स में ही भविष्य है और दूसरी की कपडा उद्योग में मानव संशाधन बेकार हो रहा है | तो उसने कपडा उद्योग को दक्षिण एशिया में अपना कपडा उद्योग को लगाना सुरु कर दिया जैसे की बांग्लादेश और वियतनाम |

यूनाइटेड स्टेट्स में प्रद्योगिकी की तेजी

1990 के अंत में यूनाइटेड स्टेट्स में इन्टरनेट और कंप्यूटर तकनीक का बूम हुआ जिसमें HP, Dell और Apple जैसी कंपनी थी | इन कंपनी को भी अपने हार्डवेयर उत्पाद के उत्पादन के लिए कम आय वाले मजदूरों की जरुरत थी लेकिन नया कारखाना बनाना काफी महंगा था इस लिए जन्म हुआ उत्पादन बाहरी ठेका देने का | और पूरबी एशिया की कंपनी का चीन में निवेश ने उसकी अर्थवयवस्था को मजबूत बनाया था | अब चीन बहुत ही अच्छे सौदेबाजी की स्थति में था | इसलिए चीन ने सशर्त विदेशी निवेश का सिधांत पेश किया जिसमें विदेशी कंपनी को स्थानीय कंपनी के साथ मिलकर काम करने और तकनिक देने को कहा | इसके तहत स्थानीय चीन की कंपनी और विदेशी उद्योग में बड़ी कंपनी के उत्पाद बनने लगे | जैसे की चीन में आज फोक्सकोन्न Apple अपने iPhone का उत्पादन करता है | कई और कंपनी जैसे की HP, Compaq और Dell इत्यादि के कंप्यूटरो और लैपटॉप पा उत्पादन भी चीन में होने लगी | लेकिन साथ में स्थानीय कंपनी ने तेजी से इन कंपनी की तकनीक को सीख वैसा ही सामान बनाना चालू कर दिया और वो भी कम कीमत पर | छोटे कंपनी के इस समूह को शंज्हाई कहा जाता है | जिससे जन्म हुआ नकलची संस्कृति का इसके तहत चीन ने सस्ते में घरेलु सामानों का बहुत बड़े मात्र में उत्पादन किया और उन उत्पादों को कम आय वाले देशो में भेजने लगा इसमें सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण है सस्ते स्मार्ट फ़ोन और लैपटॉप जिनकी मांग कम आय वाले देशो में काफी ज्यादा बड़ी विशेष रूप से 2000 के समय लेकिन इनकी गुणवक्ता को लेकेर कई सवाल उठते रहे | लेकिन इन चीनी कंपनी ने निर्यात से कमाया पैसा दुबारा अपनी कंपनी में लगा कर गुणवक्ता को भी सुधारा | यही वजह है की Lenovo और Xiaomi जैसी कंपनी विश्विक कंपनी बन कर उभर रही है | चीन की स्मार्ट फ़ोन कंपनी की वृद्धि इतनी ज्यादा थी की सैमसंग ने अपना 1992 में बना कारखाना 2019 में बंद कर दिया |

सेवा क्षेत्र में परिवर्तन

जैसा की हमने देखा की चीन की आर्थिक नीतियां समय-समय में विकशित होती रही है | यही वजाह थी की जब अमेरिका में Google, Facebook और Microsoft जैसी सेवा क्षेत्र की कंपनी का उदय हुआ तब चीन ने भी इसका फायदा उठाया | इसमें भी उसके कौशल युक्त मजदूरों का बहुत बड़ा हाथ था | जिसे वो तकनीक के बदलाव के दौरान प्रशिक्षण दे रहा था | इस बदलाव से चीन की अर्थवयवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान को 1975 में जहा 25% था उसे बढ़ा कर 2019 में 54% कर दिया | इसमें बड़ी भूमिका सुचना प्रद्योगिकी से जुडे उद्योगो का रहा | ज्होम्ग्गुंचुन तकनिकी क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है जहाँ दुनिया की बड़ी तकनिकी कंपनी के मुख्यालय और अनुशंधन केंद्र है जिसमें Google, Intel, Amazon इत्यादि जैसी कंपनी शामिल है | Microsoft ने तो यहाँ अपना 280 मिलियन डॉलर का अनुशंधन मुख्यालय भी बनाया है | उत्पादन जैसी नकलची संस्कृति सेवा क्षेत्र में भी देखने को मिला जिसमें सबसे अच्छा उदाहरण अलीबाबा इ-कॉमर्स कंपनी है जिसने Amazon, ebay और Google के विशेषता को मिला कर बनाया अगला उदाहरण है Tencent का मोबाइल मेस्संगिन एप wechat जो एक सुपर एप बन गया जानकर ये कहते है की इसने Facebook, tinder, twitter, Instagram, skype और अन्य के विशेषताओ का नक़ल किया है | चीन की सर्च इंजन baidu को भी गूगल का नक़ल कहा जाता है | 2010 में जब गूगल चीन से बहार निकल गया तो baidu के पास एकाधिकार आ गयी और baidu आज करीब 80 देशो में फैला है | और नई तकनीक जैसेकी 5G और AI को भी चीन तेजी से सम्लित करने की कोशिश में है जिससे काफी चिंता है | जैसेकी 5G में इस्तेमाल होने वाले सेलुलर नेटवर्क उपकरण का उत्पादन का बड़ा केंद्र है जिसमें Huawei और ZTE शामिल हैं लेकिन स्वीडन और यूनाइटेड स्टेट्स ने इनपर प्रतिबंध लगा दिया है | और ये कहा है की इनके उपकरण चीन की साम्यवादी सरकार को सहायता पंहुचा सकते है | चीन की इन्टरनेट सुरक्षा कानून के तहत इनकी सुरक्षा संस्था कंपनी से जानकारी मांग सकती है | भारत में भी इस पे कार्यवाही की बात चल रही है | AI को लेके नैतीक चिंता लोकतांत्रिक देशो में भी उठाते रहे है | लेकिन जब चीन इनके अनुसंधान और विकाश में बहुत ज्यादा निवेश कर रहा है तब ये चिंता और ज्यादा बढ़ जाती है | चीन ने 2012 में अकेले 160 खरब डॉलर अनुसंधान और विकाश में निवेश किये जो दुनिया में दुसरे स्थान पे था |

2008 वित्तीय संकट

चीन 1990 से 2008 तक बहुत तेजी से विकशित हुआ | लेकिन 2008 के विश्विक वित्तीय संकट, चीन की वृद्ध होती जनसँख्या और  बढती हुई वेतन के कारण चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिंग ने गो ग्लोबल निति को आक्रमक रूप से अनुसरन किया और चीन की कंपनियों को विदेशो में निवेश करने को कहा | इसमें बेल्ट एंड रोड पहल सबसे महत्वपूर्ण परियोजना जिसमें चीन के निवेश आज एशिया, अफ्रीका और यूरोप में फ़ैल गए है |

नैतीक चुनौतिया

इस आर्थिक वृद्धि में कई अँधेरा पहलू भी समय – समय सामने आते रहे है जैसेकी बंधुआ मजदूरी और गुलामी | अन्तराष्ट्रीय मानदंड के तहत मजदूरों की लेखापरीक्ष ये सुनिश्चित करती है की आर्थिक वृद्धि लोगो का शोषण न करे | लेकिन द डिप्लोमेट आखबार के अनुसार ये लेखापरीक्ष पारदर्शी नहीं होती और द गार्डियन ने चीन में बंधुआ मजदूरी का समाचार को दिखाया है | हांगकांग के माइकल मा कहते है की चीन में एक बंधुआ इंटर्नशिप का अवधारणा है जिसमें विद्यार्थियों को व्यावसायिक स्कूल स्नातक उपाधि न देने का डर बना कर उन्हें Foxconn और Quanta जैसी कंपनी में अनिवार्य बंधुआ मजदूरी करवाते है | लेकिन चीन में बंधुआ मजदूरी प्रतिबंधित है | और चीन ये कहता है की बंधुआ मजदूरी कुछ इकाईयो की समस्या है किसे वो कम करने की कोशिस में है | लेकिन चीन में लेखापरीक्ष और पारदर्शी न होना इसकी सच्चाई को जानने से रोकती है | और चीन अभी छोटे और कमज़ोर देशो में अपने सैन्य आड़े बनाने के योजना में है BRI और कर्ज के जाल कूटनीति के तहत इसका सबसे बड़ा उदाहरण श्री लंका का हमबनटोटा बंदरगाह जिसपे चीन ने 99 सालो के लिए कब्ज़ा कर लिया है |

और आज चीन दुनिया का सबसे आमीर देश बन गया है |

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